वाणिज्यिक बैंक क्या है और इसके कार्य क्या है?

आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी बैंक से अवश्य जुड़े हुए है फिर भी वाणिज्यिक बैंक क्या है? इसके संदर्भ में अधिकांश लोगो को पता नही होता है! वाणिज्यिक बैंक किसे कहते है अक्सर ये सवाल परीक्षाओ में भी पुंछे जाते है ! आईये विस्तार से वाणिज्यिक बैंक के विषय पर चर्चा करते है ताकी सभी लोगो को वाणिज्यिक बैंक के बारे में अच्छी तरह पता चल सके ! सबसे पहले वाणिज्य का अर्थ क्या होता है? से बात किया जाए तो वाणिज्य शब्द "व्यापार" से लिया गया है! एक तरह से समझा जाए तो आजकल हमारे भारत में जितने भी बैंक है सारे के सारे बैंक व्यापारी है व्यापार ही कर रहे है! व्यापार कई तरह के हो सकते है लेकिन वाणिज्य बैंक क्या है और किस तरह का कार्य करता है नीचे बेहतर ढंग से समझने की कोशिश करते है!



वाणिज्यिक बैंक क्या है और इसके कार्य क्या है?
वाणिज्यिक बैंक क्या है और इसके कार्य क्या है?



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वाणिज्यिक बैंक क्या है?


वाणिज्य बैंक (Commercial Bank) उन बैंको को कहा जाता है जो लोगों के रुपये को जमा के रूप में स्वीकार करता है एवं लोगों को मुद्रा की जरूरत परने पर उन्हें उधार के रूप में ऋण प्रदान करने का कार्य करता है! ऐसे संस्था को वाणिज्यिक बैंक, व्यवसायिक बैंक या व्यापारिक बैंक भी कहते है!



वाणिज्यिक बैंक के मुख्य कार्य क्या है?


वाणिज्यिक बैंक यानि की व्यवसायिक बैंक के मुख्य कार्य दो भागो में बांटते है और समझने की कोशिश करते है!


  • जमा स्वीकार करना
  • ऋण देना


जमा स्वीकार करना


वाणिज्यिक बैंक का पहला कार्य होता है लोगों के धन को जमा के रूप में स्वीकार करना एवं उसके जमा धन पर अच्छी खासी ब्याज देना। लोगो के धन जमा किया जा सके इसके लिए वाणिज्यिक बैंक द्वारा नीचे दिये गए निम्नलिखित प्रकार के खाते खोले जाते है जमाकर्ता अपने सुविधा अनुसार खाता का चुनाव करते है!


बचत जमा खाता- बैंको में इस प्रकार के खाते सबसे ज्यादा खुलवाए जाते है क्योंकि बचत खाता एक ऐसा खाता है जिसमे छोटी छोटी रकम जमा स्वीकार किया जाता है और खाता में जमा धन पर बैंक द्वारा सालाना अच्छा खासा ब्याज दिया जाता है! 


चालू जमा खाता- वाणिज्यिक बैंक यह खाता खासकर विजनेसमैनो को ओपेन कराने के लिए ऑफर करता है क्योंकि इस खाते में कोई लिमिटेशन नही होता एक दिन में जितना चाहे उतना पैसा जमा स्वीकार किये जाते है और निकासी के लिए भी अनुमति होता है! लेकिन कोई भी वाणिज्यिक बैंक चालू खाता में जमा धन पर ब्याज नही देता है!


सावधि जमा खाता- इस खाते के तहत कोई भी वाणिज्यिक बैंक एक निश्चित रकम एक निश्चित समय के लिए स्वीकार करता है एवं फिक्स की गई रकम पर ज्यादा से ज्यादा ब्याॅज देती है! 


आवर्ती जमा खाता- बैंक द्वारा इस खाते के अंतर्गत प्रतिमाह एक निश्चित रकम निश्चित समय तक जमा स्वीकार करता है एवं अवधि पुरा होने के उपरांत ब्याज देने का कार्य करता है!



ऋण देना


नगद जमा- बैंको की ओर से एक निश्चित जमानत के आधार पर एक निश्चित जमा राशि ॠण के तौर पर निकालने का हक देता है। इस खाते में ऋणी एक सीमा के अर्न्तगत रुपया जमा भी कर सकता है और आवश्यकतानुसार ऋण भी निकलवाता रहता है।


वाणिज्य बैंक यानी कि व्यापारिक बैंक का दूसरा मुख्य कार्य ऋण देना होता है! नीचे दिये गए निम्नलिखित तरीको से लोगो को ॠण प्रदान किया जाता है आईये समझते है!


ओवर ड्राफ्ट- बैंक में जिन जमाकर्ताओं का चालू जमा खाता होता है उसे बैंक द्वारा ओवरड्राप्ट की सुविधा मुहैया होती है यानि की चालू खाता में जमा पैसा से अधिक रूपए निकालने का अधिकार दिया जाता है! 


अग्रीम ॠण- इस प्रकार के ऋण बैंक सबसे पहले एक निश्चित रकम ऋणी के खाते में डाल देता है उसके तुरंत बाद डाले गए रकम पर ब्याॅज लगाना आरंभ भी कर देता है! खाते में डाला गया ऋण को ऋणी निकालकर उपयोग सकता है!


सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश- आजकल बैंक सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदना अच्छा विकल्प समझते है क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों में पैसे डुबने का जोखिम बहुत कम होता है। इसलिए बैंक लोगो का पैसा सरकारी प्रतिभूतियों को उधार देने के कार्य में भी लगाती है।



वाणिज्यिक बैंक के प्रकार


हमारे देश में अनगिनत बैंक उपस्थित है एवं सभी बैंको को अलग-अलग भागो में बांटा गया है! इसलिए आईये समझते है हमारे देश भारत में वाणिज्यिक बैंक कितने प्रकार के होते है!


  • निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक
  • सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक
  • विदेशी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक


निजी वाणिज्यिक बैंक- निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंको का नियंत्रण निजी हाथों में होती है जिसे प्राइवेट बैंक भी कहा जाता  है! लेकिन यह बैंक सार्वजनिक कंपनी के रूप में पंजीकृत होते है जैसे कि आईसीआईसीआई बैंक, एच.डी.एफ.सी. बैंक लिमिटेड आदि।


सार्वजनिक वाणिज्यिक बैंक- सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक राष्ट्रीयकृत बैंक होते है एवं इन सभी बैंको में अधिकांश भागीदारी भारत सरकार का बैंक आरबीआई की होती है! जैसे की भारतीय स्टेट बैंक बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक ये सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक है!


विदेशी वाणिज्यिक बैंक- जिस बैंक की स्थापना विदेशो में हुआ है लेकिन इनकी शाखाएं हमारे देश मे कार्यरत है ऐसे बैक विदेशी बैंक के श्रेणी मे आते है जैसे कि हांगकांगएण्ड शांघाई बैंकिंग कार्पोरेशन (एच.एस.बी.सी) बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक, स्टैन्डर्ड एण्ड चार्टर्ड बैंक, एबीएन ऐमरो बैंक इत्यादि।



वाणिज्यिक बैंक के नाम


निजी क्षेत्र के बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और विदेशी क्षेत्र के सभी बैंको का नाम वाणिज्यिक बैंक के लिस्ट में आते है जैसे कि आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया इत्यादि वाणिज्यिक बैंक यानी व्यवसायिक बैंक है!



वाणिज्यिक बैंक के महत्व


आज का जीवन बैंको के बिना गुजराना असंभव है! प्रत्येक व्यक्ति को अपने मुल धन पर ब्याज चाहिए किसी को ॠण चाहिए इसके लिए वाणिज्यिक बैंक अच्छा विकल्प है! आजकल लोग नेटबैकिंग, मोबाइल बैंकिंग, चेक बूक एवं एटीएम कार्ड का इस्तेमाल एटीएम मशीन से कैस निकासी, आनलाईन शापिंग,  स्वैप मशीन के जरिए बिल पेमेंट इत्यादी वाणिज्यिक बैंक का ही देन है!

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