सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) क्या है?

सहकारी बैंक- भारत में को-ऑपरेटिव बैंक के नाम से मशहूर है! ऐसे तो इस बैंक के बारे में ज्यादातर लोगो को पता नही है परंतू सहकारी बैंक से संबंधित सवाल अक्सर परीक्षाओ में पुछे जाते है! वर्तमान समय में हमारे देश भारत में अनगिनत बैंक उपस्थित है जो अपना सर्विस प्रदान करा रही है लेकिन सहकारी (Cooperative) बैंक का कार्य क्या है! आईये इस बैंक के संबंध में विस्तार से चर्चा करते है और जानते है सहकारी बैंक क्या है? सहकारी बैंक कितने प्रकार के होते है? सहकारी बैंको के नाम और सहकारी बैंक के कार्य क्या है?




सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) क्या है?
सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) क्या है?




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सहकारी बैंक क्या है?


सहकारी बैंक जिसे को-ऑपरेटिव बैंक भी कहा जाता है! यह एक वित्तीय संस्थान होती हैं जो शहरी और गैर-शहरी दोनों क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों को ऋण देने का सुविधा प्रदान करती हैं। सहकारी बैंक का गठन एवं कार्यकलाप सहकारिता के आधार पर होता है। यानि कि सहकारी का अर्थ- "साथ मिलकर काम करना" होता है दुनिया के अधिकांश भागों में सहकारी बैंक हैं जो लोगों की पूँजी जमा करते हैं तथा लोगों को धन उधार देते हैं।



सहकारी बैंक के मुख्य कार्य क्या है?


सहकारी बैंक का मुख्य कार्य शहरी या ग्रामीण क्षेत्र के लिए अधिक साख-सुविधाएं उपलब्ध कराना है एवं यह एक ऐसा वित्तीय संस्थान होता हैं जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों और किसानो को ऋण प्रदान कराने का कार्य करती हैं। सहकारी बैंक के कार्य पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निगरानी होती है! यह बैंकिंग रेगूलेशन एक्ट 1949 और बैंकिंग लाॅ एक्ट 1965 के अंतर्गत आता है इसलिए ये संस्थाएं भी वित्तीय समावेशन में सहायक भूमिका निभाती है।



भारत में सहकारी बैंको के प्रकार


भारत में सहकारी बैंक मुख्यतः चार प्रकार के है:- आईये विवरण सहित समझने की कोशिश करते है!


  • प्राथमिक सहकारी साख समिति
  • राज्य सहकारी बैंक
  • केन्द्रीय अथवा जिला सहकारी बैंक
  • भूमि विकास बैंक


प्राथमिक सहकारी साख समिति 


प्राथमिक सहकारी साख समिति यह प्राथमिक सहकारी बैंक भी कहलाता है। जिसे एक गाँव, शहर या क्षेत्र के कम से कम 10 लोग मिलकर बना सकते है। सदस्यों की संख्या ज्यादा से ज्यादा 100 हो सकती है। समिति को सहकारी समिति के रजिस्ट्रार से पंजीकरण कराना पड़ता है। ये समितियां किसी एक गाँव या शहर के लिए होती है और उसी क्षेत्र के रहने वाले लोग इसके सदस्य बन सकते है। समितियों की पूँजी सदस्यों से प्रवेश शुल्क लेकर उनको अंश बेचकर अथवा उनसे राशि जमा लेकर केन्द्रीय तथा प्रान्तीय बैंकों और सरकार से ऋण लेकर प्राप्त की जाती है।


राज्य सहकारी बैंक


प्रांतीय सहकारी बैक किसी प्रांत या राज्य के सभी सेन्ट्रल बैंको का संगठन करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सेन्ट्रल बैंको को आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक सहायता देना है। इस बैक का संबंध रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से होता है जो समय-समय पर आर्थिक सहायता दिया करता है। ये बैक अपनी कार्यशील पूँजी को अंश विक्रय से, जमा स्वीकार करके, व्यापारिक बैको या स्टेट बैंक से प्राप्त करते है। इन बैंकों का गठन विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। जैसे: मद्रास और बिहार में इन बैंकों की सदस्यता केवल केन्द्रीय बैंको तक ही सीमित है जबकि बंगाल तथा पंजाब में इनकी सदस्यता व्यक्तियों और सहकारी समितियों दोनों के लिये खुली है।


केन्द्रीय अथवा जिला सहकारी बैंक


किसी तहसील जिला या विशेष क्षेत्र की समस्त सहकारी समितियों की आर्थिक व्यवस्था के लिये एक केन्द्रीय सहकारी बैंक होता है। ये बैक शहर में होते है। इन बैंकों के सदस्य प्राथमिक समितियों तथा अन्य व्यक्ति होते है। इनका दायित्व लिमिटेड होता है। यह बैंक व्यापारिक बैंकों का कार्य करता है जैसे-जनता से रुपया जमा करना तथा ऋण देना, Cheque की धनराशि वसूल करना, प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करना, बहुमूल्य वस्तुओं को सुरक्षित रखना इत्यादि। परन्तु इन बैंकों का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक समितियों को आर्थिक सहायता देना होता है।


भूमि विकास बैंक


किसानों की लम्बे समय वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू भूमि विकास बैंक की स्थापना की गई है। ये बैंक किसानों को भूमि खरीदने, भूमि पर स्थायी सुधार करने या पुराने ऋणों का भुगतान करने इत्यादि के लिए दीर्घकालीन लोन की व्यवस्था करते हैं इस प्रकार के बैंक भूमि बंधक बैंक भी कहा जाता है। यह Apex Land Development Bank है, जो जिला स्तर पर स्वयं अपनी शाखाओं द्वारा सीधे ही अपनी गतिविधियों सम्पन्न करते हैं।



भारत में सहकारी बैंक का जन्म कब हुआ था?


भारतीय सहकारी बैंकिंग का जन्म वर्ष 1904 में सहकारी समिति अधिनियम के पारित होने के साथ शुरू हो गया था! इस अधिनियम का उद्देश्य सहकारी ऋण समितियों की स्थापना करना था लेकिन शुरूआती पंचवर्षीय योजना तक अत्यधिक विकास संभव नही हो पाया! छठी और सातवीं पंचवर्षीय योजना ने देश के सहकारी बैंक ढाँचे के विस्तार और विकास में महत्वपूर्ण योगदान निभाई!



भारत के 10 महत्वपूर्ण को-ऑपरेटिव बैंक के नाम और स्थापना


Saraswat Cooperative Bank Ltd- स्थापना- 1918

COSMOS Cooperative Bank Ltd- स्थापना- 1906

Shamrao Vithal Cooperative Bank- स्थापना- 1906

Abhyudaya Cooperative Bank Ltd- स्थापना- 1964

Bharat Cooperative Bank (Mumbai) Ltd- स्थापना- 1978

The Thane Janata Sahakari Bank- स्थापना- 1972

Punjab & Maharashtra Cooperative- स्थापना-  1984

Janata Cooperative Bank- स्थापना- 1949

Kalupur Cooperative Bank- स्थापना- 1970

NKGSB Cooperative Bank- स्थापना- 1917



वाणिज्यिक बैंक और सहकारी बैंक में क्या अंतर है?


  • भारत में वाणिज्यिक बैंकों की संख्या सहकारी बैंकों की अपेक्षा अधिक विस्तृत है।


  • वाणिज्यिक बैंक अनेक तरह के बैंकिंग सेवाए प्रदान कराता है जबकी सहकारी बैंक में वाणिज्यिक बैंक के तुलना में बैंकिंग सेवाएँ देने की क्षमता कम होती है।


  • वाणिज्यिक बैंक संयुक्त स्टॉक (Joint-Stock) बैंक हैं जबकि सहकारी बैंक सहकारी संस्थाएँ होती हैं।


  • वाणिज्यिक बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक के नियंत्रण के अधीन होता हैं जबकि सहकारी बैंक सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार द्वारा निर्धारित नियमों के अधीन होता हैं।


  • सहकारी बैंकों की ब्याज दर वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में अधिक रहती है।


  • व्यक्तियों और व्यवसायों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने वाले बैंक को वाणिज्यिक बैंक कहा जाता है। और सहकारी बैंक एक ऐसा बैंक है जो किसानों, ग्रामीण उद्योगों और शहरी क्षेत्रों के व्यापार और उद्योग (लेकिन एक सीमित क्षेत्र तक) को वित्तपोषण प्रदान करता है।

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