सरकारी और प्राइवेट बैंक में क्या अंतर है (Difference Between Public And Private Bank)

सरकारी और प्राइवेट बैंक में क्या अंतर है (Difference Between Public And Private Bank) जानने आये है तो आपका स्वागत है, दोस्तों जैसा की आपको भलीभांति पता होगा अभी हमारें देश भारत में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और 21 निजी क्षेत्र के बैंक मौजूद है और ये सभी बैंक देश के आर्थिक और समाजिक विकास में लगभग समान रूप से अपना भुमिका निभा रहे है, परंतु आज-कल बैंकिंग परीक्षाओ की तैयारी करने वाले प्रतियोगी एवं बैंक में खाता ओपेन करवाने वाले अधिकांश लोग सबसे ज्यादा सरकारी बैंकों को तवज्जो देते है यानि सरकारी बैंक में नौकरी या अपना खाता ओपेन कराना चाहते है, लेकिन वर्तमान समय में देखा जाए तो प्राइवेट बैंक सरकारी बैंकों के मुक़ाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही है । चलिए अब इधर-उधर की बाते ना करते हुए जानने की कोशिश करते है आखिर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और निजी क्षेत्र के बैंकों में क्या अंतर है यानि सरकारी बैंक और प्राइवेट बैंक में अंतर क्या है (Sarkari Or Private Bank Me Kya Antar Hai)



सरकारी और प्राइवेट बैंक में क्या अंतर है (Difference Between Public And Private Bank)
सरकारी और प्राइवेट बैंक में क्या अंतर है (Difference Between Public And Private Bank)




सरकारी बैंक और प्राइवेट बैंक में अंतर (Difference Between Government Bank And Private Bank)


सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जिसे सरकारी बैंक कहा जाता है इन बैंकों में शेयर का ज्यादातर हिस्सा (लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी) सरकार के पास रहती है इसलिए इन बैंकों पर सरकार का नियंत्रण होता है जबकि निजी क्षेत्र के बैंक यानि  प्राइवेट बैंकों में ज्यादातर हिस्सा बड़े शेयर होल्डर के पास रहता है मतलब इन बैंकों को खासकर किसी न किसी निजी समूह के द्वारा संचालित किये जाते हैं ।


सरकारी और प्राइवेट दोनो बैंक ग्राहकों को बैंकिंग सुविधाए लगभग एक समान प्रदान कराती है फिर भी देखा जाए तो प्राइवेट सेक्टर के बैंक सरकारी बैंकों के मुक़ाबले अधिक सुविधाए प्रदान कराता है लेकिन इसके लिए सरकारी बैंकों के तुलना में प्राइवेट बैंक कुछ ज्यादा ही शुल्क वसूल करता है ।


सरकारी बैंक सरकार के स्वामित्व एवं नियंत्रण वाला बैंक है और इस बैंकों को बाजार में आये हुए काफी वर्ष हो चुके है इसलिए सरकारी बैंक ग्राहको का विश्वास जितने में सफल हो चुके है जबकि बहुत ऐसे प्राइवेट बैंक भी है जो काफी पुराना है फिर भी प्राइवेट बैंकों का इतिहास देखा जाए तो कुछ बैंक सही ढंग से संचालित ना करने के स्थिति में बंद हो गए और लोगो का पैसा भी डुब गया जिसके कारण प्राइवेट बैंकों पर कुछ लोग विश्वास नही जताते है ।


सरकारी क्षेत्र के बैंकों में नियुक्ति पाने हेतु सरकार द्वारा बनाये गए दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है, इसके लिए प्रतियोगियों को लिखित परीक्षा से लेकर कंप्यूटर टेस्ट और इंटरव्यू के साथ ग्रुप डिस्कशन आदि में भाग के बाद ही सरकारी बैंकों में चयन हो पाता है, इस दौरान सरकारी कोटा प्रणाली से जुड़े नियमों का भी पालन किया जाता है । वहीं दूसरी ओर प्राइवेट बैंकों में वॉक-इन-इंटरव्यू, रेफरल और केंपस रिक्रूटमेंट आदि के आधार पर चयन कर लिया जाता है । हाल कि बात किया जाए तो अब प्राइवेट क्षेत्र के कई बैंक चयन हेतु प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन करने लगे है, लेकिन सरकार की कोटा संबंधी नियमों का पालन प्राइवेट बैंकों द्वारा नहीं किया जाता है ।


सरकारी बैंक अपने कर्मचारियों को इस तरह से प्रशिक्षित करता है जिससे कि वह लंबे समय तक आसानी से काम कर सकें । वहीं दूसरी ओर प्राइवेट बैंकों में ऑन जॉब ट्रेनिंग प्रदान की जाती है, ताकि कर्मचारी प्रतिस्पर्धा के अनुसार काम कर सके एवं प्राइवेट बैंक बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को और भी ज्यादा प्रशिक्षित हेतु बाहर भी भेजते हैं ।


सरकारी बैंकों में सरकार द्वारा बनाई गई पाॅलिशी के अनुसार विभिन्न पदो पर नियुक्ति और उस पद के लिए निर्धारित वेतन दिए जाते है, जबकि प्राइवेट बैंकों में देखा जाए तो पद या वेतन योग्यता और अनुभव के आधार पर दिया जाता है ।


सरकारी बैंकों में कार्यरत कर्मचारी अपनी नौकरी ज्यादा सुरक्षित समझते हैं क्योंकि इनके छोटी गलतियो पर सुधार करने का वक्त मिल जाता है यानि इन्हे बाहर तभी किया जाता है जब बहुत बड़ी गलती करते है । वहीं प्राइवेट बैंकों में बाजार की प्रतिस्पर्धा की वजह से गलती करने के उपरांत कर्मचारियों को नौकरी गंवाने की आशंका बनी होती है इसलिए वे बेहद दबाव में काम करते हैं ।


सरकारी बैंकों में सभी कर्मचारी बिना किसी टेंशन के काम करते हैं क्योंकि यहां अधिक प्रतिस्पर्धा नहीं होती है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेट बैंकों में कार्यरत कर्मचारियों को दिए गए टारगेट को पूरा करना होता है जिसके कारण उन्हें दबाव महसूस होता है ।


सरकारी बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों को मामूली ब्याज दरों पर ऋण और पेंशन योजना जैसी सुविधाएं मिल मिलती है, जबकि प्राइवेट बैंक इस प्रकार की सुविधा नहीं देते हैं, परंतु कुछ प्राइवेट बैंक समय-समय पर अपने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को पुरस्कार देकर उत्साह अवश्य बढ़ाते है ।


सरकारी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक कहीं भी ट्रांसफर कर देते हैं, जबकि दूसरी ओर प्राइवेट क्षेत्र के बैंकों में देखा जाए तो कई बार कर्मचारी हमेशा एक ही स्थान पर काम करते रह जाते हैं यानि प्राइवेट बैंकों में ट्रांसफर जैसी कोई समस्या नहीं होती है ।



ये भी जानिए:-


यूको बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

केनरा बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

एक्सिस बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

इंडियन बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

एचडीएफसी बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

भारतीय स्टेट बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

बैंक ऑफ बड़ौदा सरकारी है या प्राइवेट?

बैंक ऑफ इंडिया सरकारी है या प्राइवेट?

पंजाब नेशनल बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

आईसीआईसीआई बैंक सरकारी है या प्राइवेट?

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post