रिज़र्व बैंक और स्टेट बैंक में क्या अंतर है? - Difference Between RBI And SBI In Hindi

RBI और SBI यानि भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक दोनों बैंकों का नाम लगभग एकसमान होने के साथ-साथ मौजूदा समय में भारत का प्रचलित बैंक भी है । आईयें जरा संक्षेप में रिज़र्व बैंक और स्टेट बैंक के इतिहास के साथ-साथ RBI और SBI में क्या अंतर है जानने की कोशिश करते है । दोस्तों रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 ब्रिटिश काल में ब्रिटिश सरकार द्वारा केंद्रीय बैंक रूप में किया था और इसका राष्ट्रीयकरण भारत सरकार ने 1 जनवरी 1949 में करते हुए देश का सर्वोच्च बैंक केंद्रीय बैंक का वो सभी अधिकार दे दिया जो की ब्रिटिश सरकार द्वारा नही दिये गये थे । अब यदि स्टेट बैंक की बात किया जाए स्टेट बैंक भारत का सबसे पुराना वाणिज्यिक बैंक है यानि ब्रिटिश काल 27 जनवरी 1921 में बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बांबे, बैंक ऑफ मद्रास तीनो को मिलाकर इम्पीरियल बैंक और फिर भारतीय सरकार द्वारा इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर 1 जुलाई 1955 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में तब्दील किया गया था और आज के वर्तमान समय में स्टेट बैंक प्रत्येक भारतीयों का पसंदीदा सार्वजनिक वाणिज्यिक बैंक बन चुकी है । चलिए अब सिधे मुद्दे पर चर्चा करते है रिज़र्व बैंक और स्टेट बैंक किस प्रकार का बैंक है यानि भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में क्या अंतर है?



रिज़र्व बैंक और स्टेट बैंक में क्या अंतर है? - Difference Between RBI And SBI In Hindi
रिज़र्व बैंक और स्टेट बैंक में क्या अंतर है? - Difference Between RBI And SBI In Hindi




रिज़र्व बैंक और स्टेट बैंक में क्या अंतर है? - Difference Between RBI And SBI In Hindi


भारतीय रिज़र्व बैंक भारत का सर्वोच्च बैंक है भारत में केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य कर रहा है जबकी भारतीय स्टेट बैंक एक सार्वजनिक वाणिज्यिक बैंक है ।


रिज़र्व बैंक लोक कल्याण और देश की आर्थिक विकास के उद्देश्य से कार्य करता है जबकि स्टेट बैंक देश में मुनाफे कमाने के उद्देश्य से कार्य करता है ।


रिज़र्व बैंक देश के अर्थव्यवस्था की वित्तीय प्रणाली की निगरानी एवं ​​नियंत्रण जैसे मुख्य कार्य करता है जबकी स्टेट बैंक नागरिकों के धन को जमा और जरूरत परने पर ऋण प्रदान करने जैसे मुख्य कार्य करता है ।


सरकार द्वारा रिज़र्व बैंक को नोट छापने और जारी करने का अधिकार प्राप्त होता है दूसरी ओर, स्टेट बैंक के पास ऐसा अधिकार नहीं है ।


रिज़र्व बैंक "बैंकों का बैंक" कहलाता है क्योंकि सभी वाणिज्यिक बैंकों का लाइसेंस जारी, रद्द, एक दूसरे में मर्ज और इनके विभिन्न कार्यो पर रिज़र्व बैंक नजर रखता है जबकी रिज़र्व बैंक सरकार के दिशानिर्देश पर कार्य करता है ।


रिज़र्व बैंक में सरकार और वाणिज्यिक बैंकों का अकाउंट होता है जबकि आम जनता का अकाउंट केवल वाणिज्यिक बैंकों में ओपेन किया जाता है ।


आम नागरिकों को ऋण की आवश्यकता परने पर वाणिज्यिक बैंक पूर्ती करता है जबकि वाणिज्यिक बैंकों को ऋण की जरूरत पड़ने पर रिज़र्व बैंक देता है ।



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