भारतीय रिजर्व बैंक कहां है Bhartiya Reserve Bank Kahan Hai

भारतीय रिज़र्व बैंक कहां है भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना कब हुई? भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना किसने किया था? भारतीय रिजर्व बैंक के संस्थापक कौन थे? भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था? भारतीय रिज़र्व बैंक का कार्य क्या है? इन सारे सवालों का जवाब जानने आयें है तो आपकों अवश्य ही पता होगा भारतीय रिज़र्व बैंक भारत का एक ऐसा सर्वोच्च केंद्रीय बैंक है जिसे बैंकों का बैंक कहा जाता है यानि संपष्ट रूप में बात किया जाए तो भारत के विभिन्न प्रकार के बैंकों को और भारतीय अर्थ-व्यवस्था को रिज़र्व बैंक के द्वारा ही नियंत्रित किया जाता है । अब मुद्दे पर बात किया जाए तो अक्सर बैंकिंग परीक्षाओ में भारतीय रिज़र्व बैंक से संबंधित सवाल पुंछे जाते है, यदि आप इन सारें सवालों का जवाब ढूढ़ने आये है तो संपूर्ण आर्टिकल जरूर पढ़ें मैं आपके समक्ष विस्तार से उत्तर बताने का प्रयास करूगां, चलिए देर किए बिना भारतीय रिज़र्व बैंक कहां है Bhartiya Reserve Bank Kahan Hai एवं अन्य सभी सवाल का जवाब भी जानने की कोशिश करेगें ।



भारतीय रिजर्व बैंक कहां है (Where Is The Reserve Bank Of India)
भारतीय रिजर्व बैंक कहां है Where Is The Reserve Bank Of India




भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना किसने किया था?


1920 के दशक में ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित संस्था 'हिल्टन यंग आयोग' भारतीय मुद्रा और वित्त पर रॉयल कमीशन था, इस आयोग ने ब्रिटिश सरकार से 1926 में एक केंद्रीय बैंक बनाने की सिफारिश की, जिसके कुछ वर्ष बाद 1934 में विधान सभा में केंद्रीय बैंक स्थापित हेतु विधेयक पेश किया गया एवं गवर्नर जनरल की सहमति प्राप्ति के उपरांत ब्रिटिश सरकार द्वारा देश में भारतीय रिज़र्व बैंक को स्थापित किया गया था ।



भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना कब हुई?


रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया ऐक्ट, 1934 के मुताबिक 1 अप्रैल 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हुई थी, एवं रिज़र्व बैंक संस्थापकों में डॉ. भीमराव अम्बेडकर भी मौजूद थे ।



भारतीय रिज़र्व बैंक का मुख्यालय कहां है?


प्रारम्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक का मुख्यालय कोलकाता में ही था, परंतु सन् 1937 में कोलकाता से हस्तांतरित करके मुम्बई कर दिया गया, वर्तमान में भारतीय रिज़र्व बैंक का मुख्यालय मुबंई में स्थित है ।



भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कब किया गया?


आजादी प्राप्ती के बाद भारतीय सरकार रिज़र्व बैंक को अपने अधीन करते हुए इसका राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 में किया था एवं भारतीय रिज़र्व बैंक को केंद्रीय बैंक का विभिन्न प्रकार के अधिकार दे दिया ।



भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्य क्या है?


भारतीय रिज़र्व बैंक के पांच प्रमुख कार्य निम्नलिखित प्रकार है:-


1. बैंक और सलाहकार के रूप में कार्य


रिज़र्व बैंक (केंद्रीय बैंक) भारत सरकार का बैंक, एजेंट एवं वित्तीय परामर्शदाता के रूप में कार्य करता है । यानि जरूरत परने पर केंद्रीय बैंक सरकार को बिना ब्याज ऋण देने तथा सरकार के लिए प्रतिभूतियो, ट्रेजरी बिलों आदि का भी क्रय-विक्रय करता है । देश का सर्वोच्च बैंक होने के नाते यह सरकार के आर्थिक, वित्तीय एवं मोद्रिक विषयों पर सलाह देने के कार्य भी करता है ।


2. देश की मुद्रा छापने के कार्य


किसी भी देश का नोट छापने और जारी करने के कार्य वहां के केंद्रीय बैंक करता है क्योंकि देश के सरकार द्वारा नोट छापने और जारी करने का अधिकार केवल केंद्रीय बैंक को प्राप्त होता है । भारत में सभी प्रकार के नोट रिजर्व बैंक द्वारा छापे और जारी किए जाते है । केवल एक रूपए की नोट भारत सरकार के वित्त मंत्रालय जारी करता है ।


3. वाणिज्यिक बैंकों का निरीक्षण कार्य


रिज़र्व बैंक को बैंकों का बैंक भी कहा जाता है क्योंकि आम लोगों का अकाउंट वाणिज्यिक बैंक में होता है और वाणिज्यिक बैंक का अकाउंट केंद्रीय बैंक में होता है । एवं सभी वाणिज्यिक बैंकों का लाइसेंस जारी, लाइसेंस रद्द, ऋण देने, वाणिज्यिक बैंकों को एक दूसरे में विलय से लेकर वाणिज्यिक बैंक के अन्य सभी कार्यो पर नजर रखने के काम केंद्रीय बैंक यानि रिज़र्व बैंक करता है ।


4. विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण कार्य


विदेशी विनिमय दर को स्थिर रखने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्राओं को खरीदता और बेचता भी है एवं देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा भी करता है । विदेश विनिमय बाज़ार में जब विदेशी मुद्रा की आपूर्ति कम हो जाती है तो केंद्रीय बैंक द्वारा बाजार में विदेशी मुद्रा को बेचा जाता है जिससे कि इसकी आपूर्ती बढाई जा सके और जब विदेशी मुद्रा की आपूर्ति अर्थव्यवस्था में बढ़ जाती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार से विदेशी मुद्रा को खरीदता है ।


5. आर्थिक विकास का प्रोत्साहन कार्य


केंद्रीय बैंक देश के आर्थिक विकास के लिए कई तरह के विकासात्मक तथा प्रोत्साहन संबंधी कार्य करते हैं । एक ओर वह मुद्रा तथा पूंजी बाजार का विकास करता है तथा दूसरी ओर देश के आर्थिक विकास हेतु कृषि तथा उद्योगों को उचित वित्त प्रदान भी करता है । यह आर्थिक नियोजन की सफलता के लिए पर्याप्त वित्त भी प्रदान करता है ।



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