सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं?

सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं? - यह सवाल सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करने वाले अधिकांश खाताधारको के मन में जरुर उठता है। क्योंकि लोग अपने कमाई के कुछ हिस्से भविष्य के लिए बचत करना चाहते है ताकी उनके ख्वाहिशे पुरी हो सके या मुसीबतो के टाईम उनके काम आ सके। ऐसे भी आज के दौर में देखा जाए तो सामान्य लोगो द्वारा बैंको में सबसे ज्यादा सेविंग अकाउंट यानी की बचत खाता ही खुलवाये जाते है एवं घरेलु खर्च के उपरांत बचे हुए पैसे बचत खाते में जमा करते है और जरूरत परने पर निकालते भी है। अब मुद्दे पर बात किया जाए तो कुछ लोगो को सेविंग अकाउंट में पैसे जमा और निकासी को लेकर उनके मन में कुछ सवाल उत्पन्न होते है जैसे की सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं? सेविंग अकाउंट से कितना पैसा निकाल सकते हैं? एक आदमी कितने बैंक अकाउंट रख सकता है? सेविंग अकाउंट पर टैक्स कब लगता है? दोस्तो यदि आप इस प्रकार के सवालो का जबाव जानना चाह रहे है तो बिल्कुल सही जगह पर आये है पूरी लेख को जरूर पढ़े इन सभी सवालो का जबाव आपको अवश्य मिल जाएगी ।



सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं?
सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं?




सेविंग अकाउंट किसे कहते हैं?


शायद आप भलीभांति जानते होगें सामान्य व्यक्ति के द्वारा किसी भी बैंक में सेविंग अकाउंट ही ओपेन करवाया जाता है जिसे बचत खाता भी कहा जाता है । बचत खाता सामान्य व्यक्तियों के लिए फायदेमंद भी है क्योंकि महीने में कुछ राशि इस खाते में डालकर बचत करने के उपरांत बैंक द्वारा अपने धन पर अच्छा-खासा ब्याज प्राप्त किया जाता है । भारत में कमर्शियल बैंकों द्वारा कई तरह के सेविंग अकाउंट यानी की बचत खाता खोले जातें है इसलिए बेहतर ढंग से सेविंग अकाउंट से संबंधित सवालो के बारे में जानने से पहले बैंको द्वारा कितने तरह के सेविंग अकाउंट खोले जाते है नीचे सेविंग अकाउंट के निम्न प्रकार देख सकते है:-


  • नियमित बचत खाता (रेगुलर सेविंग अकाउंट)
  • वेतन बचत खाता (सैलरी सेविंग अकाउंट)
  • संयुक्त बचत खाता (ज्वाइंट सेविंग अकाउंट)
  • जन-धन बचत खाता (जीरो बैलेंस सेविंग अकाउंट)
  • नाबालिग बचत खाता (माइनर्स सेविंग अकाउंट)
  • वरिष्ठ नागरिक बचत खाता (सिनियर सिटीजन अकाउंट)



सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं?


अधिकतर लोगों के पास सामान्य बचत खाता (रेगुलर सेविंग अकाउंट) ही होता है । इस तरह के खाते में पैसा जमा करने की कोई सीमा नहीं होती । मतलब साफ साफ है सामान्य बचत खाते में जितना चाहे उतना पैसा रख सकते है । हालांकि कोई बैंक चाहें तो अपने बैंक की सेविंग अकाउंट पर जमा करने की लिमिट रख सकता है मगर कोई भी बैंक ऐसा नही करता है ।


सेविंग अकाउंट से कितना पैसा निकाल सकते हैं?


जिस प्रकार सामान्य बचत खाता में पैसे जमा और रखने की कोई सिमा नही होती ठीक उसी तरह सेविंग अकाउंट से पैसे निकालने की कोई लिमिट नही होता जितना चाहें उतना पैसा निकाला जा सकता है। लेकिन बैंक चाहें तो बचत खाते से पैसे निकालने की लिमिट रख सकता है । 


जनधन अकाउंट में कितना पैसा रख सकते हैं?


भारत सरकार के जन-धन योजना के तहत जिन्होंने जन-धन बचत खाता ओपेन कराया है । इस खाते में बैलेंस बनाये रखने की जरूरत नही होती लेकिन जन-धन बचत खाता में एक लाख रूपए से अधिक जमा नही किया जा सकता है और एक लाख से ज्यादा निकाला भी नही जा सकता क्योंकि आप समझ सकते हो इस अकाउंट में मात्र एक लाख रूपए तक ही जमा रखा जाता है ।


सेविंग अकाउंट में न्यूनतम कितना पैसा जमा कर सकते है?


अधिकांश बैंको के सेविंग अकाउंट में कैस डिपॉजिट फाॅर्म के जरिए न्यूनतम 10 रूपए और इससे अधिक तथा आनलाईन न्यूनतम 1 रूपए और इससे अधिक जितना चाहे जमा किया जा सकता है । अब यदि बात करे सेविंग अकाउंट में कितनी बार पैसे जमा कर सकते है? तो कई ऐसे बैंक है जो लिमिट तय कर रखी है जैसे की भारतीय स्टेट बैंक में हर महीने ज्यादा से ज्यादा 3 बार कैस डिपॉजिट करा सकते है इससे ज्यादा बार जमा करने पर शुल्क लेता है यानी की सेविंग अकाउंट से शुल्क के रूप में पैसे कट कर देता है। आईसीआईसीआई बैंक भी महीने में चार बार निशुल्क जमा करता है इसके बाद 1000 रूपए पर 5 रूपए शुल्क लगाता है ।


सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस कितना होना चाहिए?


जीरो बैलेंस अकाउंट यानि की जन-धन बचत खाता को छोड़कर सामान्य सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैंलेंस बनाये रखने की बैंको द्वारा शर्ते बनाई गई होती है । सामान्य सेविंग अकाउंट में बैलेंस न रखने के स्थिति में बैंक पेनाल्टी काटते हैं । हालांकि हाल ही में SBI ने अपने सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस रखने की लिमिट को खत्म कर दी है । लेकिन अधिकांश बैंक सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस तिमाही स्तर पर बनाये रखने की शर्ते सुनिश्चित कर रखा है । पंजाब नेशनल बैंक की बात किया जाए तो ये शहरी शाखाओं के सेविंग अकाउंट में हर तिमाही का औसत बैंलेंस 2000 रुपए रखना जरूरी है। छोटे शहरों की शाखाओं में, 1000 और ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं में 500 रुपए तिमाही औसत बैलेंस रखना जरूरी है। आपका किस बैंक में सेविंग अकाउंट है मिनिमम बैलेंस बनाये रखने की शर्ते बैंक की वेबसाइट पर देख सकते है ।


एक आदमी कितने बैंक अकाउंट रख सकता हैं?


अभी तक ऐसा कोई भी प्रावधान नही बना है की एक व्यक्ति कितना अकाउंट ओपेन करा सकता है । प्रत्येक आदमी अपनी सहुलियत के हिसाब से जितना चाहें उतना सेविंग अकाउंट ओपेन कराने के लिए स्वतंत्र है । लेकिन ध्यान देने योग्य बाते है अकाउंट एक हो या पांच इनमें कैस डिपॉजिट 10 लाख के अंदर ही होना चाहिए वरना व्यक्ति इंन्कम टैक्स के दायरे में आ सकता है । 


सेविंग अकाउंट पर टैक्स कब लगता है?


कोई व्यक्ति अपने एक या एक से अधिक सेविंग अकाउंट में सालाना 10 लाख से ज्यादा रकम फाॅर्म या चेक के जरिए कैस डिपॉजिट एवं निकासी करता है तो इंनकम टैक्स के दायरे में आ जाता है । सालाना 10 लाख या इससे ज्यादा फाॅर्म और चेक द्वारा कैस डिपॉजिट या ट्रांजेक्शन करने पर इंनकम टैक्स विभाग को उनके वेबसाईट के जरिए सूचित करना आवश्यक बन जाता है । अन्यथा बैंक इंनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सूचित कर देता है तथा इंनकम टैक्स की ओर से सेविंग अकाउंट होल्डर को नोटिस भेजकर ब्योरा मांगा जाता है जैसे की इंनकम सोर्स क्या है? पैसे कहां से आये? इसकी जानकारी सही सही देने पर कोई दिक्कत नही होता । गलत जानकारी देने के स्थिति में इंनकम टैक्स विभाग अपने ऑफिसर भेजकर कार्रवाई कर सकता है ।


नोट - आनलाईन जैसे की NEFT, RTGS, IMPS, UPI के जरिए ट्रांजेक्शन पर कोई परेशानी नही होता क्योंकि एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में ट्रांजेक्शन किया गया रिकॉर्ड बैंक के पास होती है । केवल फाॅर्म या चेक के जरिए कैस डिपॉजिट और निकासी करने पर नियम लागू है ।


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